दो सेमेस्टर की एक साथ होंगी परीक्षाएं, दिसंबर में होनी थी फर्स्ट सैम की परीक्षा

दो सेमेस्टर की एक साथ होंगी परीक्षाएं, दिसंबर में होनी थी फर्स्ट सैम की परीक्षा

November 26, 2019 03:01 PM
दो सेमेस्टर की एक साथ होंगी परीक्षाएं, दिसंबर में होनी थी फर्स्ट सैम की परीक्षा

दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग की पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। बीते दिनों दिल्ली हाई कोर्ट ने छात्रों की याचिका पर सुनवाई के दौरान एसओएल के पहले सेमेस्टर की परीक्षा के आयोजन पर रोक लगा दी है। जिसके बाद एसओएल प्रशासन की तरफ से सोमवार को नोटिस जारी करते हुए छात्रों से कहा कि स्नातक पाठ्यक्रमों के पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं 27 नवंबर 2019 से शुरू होनी थी। लेकिन इसे अगले वर्ष मई-जून 2020 तक स्थगित कर दिया है। यह परीक्षाएं चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम सेमेस्टर प्रणाली के तहत होनी थी। अब पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं अगले वर्ष मई-जून में होने वाली दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाओं के साथ आयोजित की जाएंगी। एसओएल के ओएसडी रमेश भारद्वाज ने यह नोटिस जारी किया।

एसओएल में इस वर्ष से ही डीयू की कार्यकारी परिषद (ईसी) और अकादमिक परिषद (एसी) की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि एसओएल में सेमेस्टर प्रणाली के अनुरूप अब से परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। दिसंबर में डीयू के कॉलेजों में पढ़ रहे स्थायी छात्रों के साथ में यह परीक्षाएं आयोजित होंगी। अभी तक एसओएल की वार्षिक परीक्षाओं का ही आयोजन होता था। हालांकि सेमेस्टर प्रणाली को सीबीसीएस के साथ लागू करने के प्रशासन के निर्णय के खिलाफ छात्रों ने विरोध जताया था।
डीयू एसओल में इसी सत्र से सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है जबकि पहले वार्षिक परीक्षाएं हुआ करती थीं। उधर छात्रों का आरोप है कि संस्थान ने जल्दबाजी में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया है, जिसके अनुसार ना तो पढ़ाई पूरी गई और ना ही स्टडी मटीरियल उपलब्ध करवाया गया है। जिसे लेकर कुछ छात्र कोर्ट पहुंचे हैं। जहां उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने पहले सेमेस्टर की परीक्षा के लिए तैयारी नहीं करवाई है।
कुलपति की तरफ से भी एक रिपोर्ट सौंपी गई जिसमें दो विकल्प सुझाए गए हैं। ये विकल्प हैं कि फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षा दिसंबर 2019 में ली जाए या फिर फर्स्ट और सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा मई-जून, 2020 में ली जाए। जिसे लेकर एसओएल के अधिकारियों का कहना है कि हमने कई छात्रों से बात की है ज्यादातर छात्र दिसंबर में परीक्षा का विकल्प चुनना चाहते थे हालांकि हम कोर्ट के फैसले का आनुसरण करेंगे। वहीं दूसरी तरफ छात्रों का कहना है कि उन्होंने मई-जून में परीक्षा को प्राथमिकता दी क्योंकि जो स्टडी मटीरियल दिया गया है उससे एक महीने में परीक्षा दे पाना मुश्किल है।


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