गबन के मामले में आरोपी कर्मी के खिलाफ बैंक प्रबंधन ने जारी किया मुकदमा दर्ज कराने का आदेश

गबन के मामले में आरोपी कर्मी के खिलाफ बैंक प्रबंधन ने जारी किया मुकदमा दर्ज कराने का आदेश

October 09, 2019 01:32 PM
गबन के मामले में आरोपी कर्मी के खिलाफ बैंक प्रबंधन ने जारी किया मुकदमा दर्ज कराने का आदेश

देहरादून : राज्य सहकारी बैंक में गबन के मामले में आरोपी कर्मी के खिलाफ बैंक प्रबंधन ने मुकदमा दर्ज कराने का आदेश जारी कर दिया है। उम्मीद है कि बुधवार को संबंधित कर्मी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो सकता है। वहीं इस कर्मी के धोखाधड़ी करने का एक और मामला सामने आया है। जिसमें संबंधित कर्मी ने किसी दूसरे की आईडी का प्रयोग कर स्वरोजगार योजना के तहत 50 हजार रुपये का ऋण लेकर पैसा अपनी पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिया।  काशीपुर राज्य सहकारी बैंक में सोमवार को बैंक के दो लाख रुपये का गबन करने का मामला खुला था। जिसमें बैंक कर्मी दानू ने सीडीएल लिमिट में छेड़छाड़ कर पांच लाख का लोन करने के बाद दो लाख अपने खाते में रख लिए थे।

इस काम में उक्त कर्मी ने बैंक के ही किसी व्यक्ति की आईडी का इस्तेमाल किया। बैंक प्रबंधन ने उक्त कर्मी को निलंबित करते हुए इस मामले में जांच बैठा दी थी। अब इस कर्मी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश बैंक प्रबंधन ने जारी कर दिए है। बैंक सूत्रों के मुताबिक यही व्यक्ति था जो करीब तीन साल पहले लाखों के गबन में पकड़ा गया था। उस समय इस कर्मी को चतुर्थ श्रेणी कर्मी में रिवर्ट किया गया था और गबन के पैसे की रिकवरी का आदेश दिया गया था। उस समय इस कर्मी ने जहर खा लिया था, इस वजह से भी राज्य सहकारी बैंक बुरी तरह से इस मामले में उलझा था। इधर इस कर्मी के खिलाफ एक और मामला सामने आया है। जिसमें उक्त कर्मी ने फर्जी तरीके से अपनी पत्नी के नाम 50 हजार रुपये स्वरोजगार योजना के नाम पर भी निकाले। इस मामले में भी बैंक प्रबंधन ने उक्त कर्मी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश जारी किया है।

धोखाधड़ी का दूसरा मामला सामने आने पर बैंक की साख पर भी सवाल उठ रहा है। जांच के स्तर पर यह भी देखा जा रहा है कि  एक बार संदेह के दायरे में आने पर उक्त कर्मी को किस तरह से बैंक के साफ्टवेयर तक पहुंचा। सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत का कहना है कि इस मामले में उन्होंने बैंक अध्यक्ष दान सिंह रावत से बात कर सख्त कदम उठाने को कहा है। मंत्री के मुताबिक जांच में अगर उक्त कर्मी दोषी पाया जाता है तो उसे बर्खास्त किया जाएगा। दूसरी ओर, जरूरत पड़ी तो जांच के दायरे में भी विस्तार किया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि किस तरह से यह फर्जीवाड़ा होने दिया गया और लापरवाही के लिए और कौन-कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं।


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